कभी घर और बच्चों की जिम्मेदारियों तक सीमित रहने वाली ग्राम धनौली की रोशनी साहू ने मेहनत, आत्मविश्वास और समूह की ताकत से अपने जीवन की दिशा बदल दी। आज वह न केवल स्वयं आत्मनिर्भर हैं, बल्कि अपने समाज की महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बनी हुई हैं।
ग्रामीण आजीविका मिशन की गतिविधियां शुरू होने के बाद रोशनी ने अपने समाज की 10 महिलाओं के साथ मिलकर आदर्श स्व-सहायता समूह का गठन किया। समूह की महिलाओं ने नियमित बैठक, बचत और आपसी सहयोग की शुरुआत की। तीन माह बाद समूह को चक्रीय कोष से 20 हजार रुपये प्राप्त हुए। इसके बाद महिलाओं ने नियमित रूप से बचत और आपसी लेन-देन करते हुए समूह को मजबूत बनाया।
छह माह बाद समूह को 1.50 लाख रुपये का बैंक लिंकेज मिला। रोशनी ने इसमें से 40 हजार रुपये का ऋण लेकर किराना एवं दैनिक उपयोग की सामग्री की दुकान शुरू की। शुरुआत छोटी थी, लेकिन मेहनत और लगन से कारोबार धीरे-धीरे बढ़ता गया। समय पर ऋण की राशि वापस करने के बाद उन्होंने दोबारा ऋण लेकर दुकान का विस्तार किया। आज उनकी दुकान में करीब 3 लाख रुपये का सामान उपलब्ध है और वे लखपति दीदी की श्रेणी में शामिल हो चुकी हैं।
रोशनी कहती हैं, “अगर हम थोड़ा भी प्रयास करें और घर से बाहर निकलकर कुछ करने का साहस रखें, तो महिलाएं भी हर क्षेत्र में आगे बढ़ सकती हैं। कोई काम केवल पुरुषों के लिए नहीं है।”
रोशनी अपने अनुभव का श्रेय मध्यप्रदेश ग्रामीण आजीविका मिशन और मध्यप्रदेश शासन द्वारा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों को देती हैं। वह अपने समाज की महिलाओं से आगे बढ़ने और आत्मनिर्भर बनने का आह्वान करते हुए कहती हैं कि जब महिला स्वयं आत्मनिर्भर बनती है, तो परिवार मजबूत होता है और परिवारों की मजबूती से समाज सशक्त बनता है।
रोशनी साहू की कहानी इस बात की मिसाल है कि संकल्प, समूह की शक्ति और निरंतर मेहनत से छोटे कदम भी बड़े बदलाव की शुरुआत बन सकते हैं।