सीधी शहर की यातायात व्यवस्था को अधिक सुगम और व्यवस्थित बनाने की दिशा में प्रशासन द्वारा आज से बस संचालन की नई व्यवस्था लागू कर दी गई। पुराने बस स्टैंड से बसों का संचालन पूरी तरह बंद कर बसों को नए बस स्टैंड से संचालित किया गया। वहीं, पुराने बस स्टैंड को श्रमिकों के लिए अस्थायी ‘लेबर चौक’ के रूप में निर्धारित किया गया है। इस नई व्यवस्था के पहले दिन प्रशासन ने एक ओर यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाने पर जोर दिया, वहीं दूसरी ओर श्रमिकों और यात्रियों की सुविधा एवं जरूरतों का भी विशेष ध्यान रखा।

कलेक्टर विकास मिश्रा ने कहा कि शहर की यातायात व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए बसों का संचालन नए बस स्टैंड से किया जाना आवश्यक है। इससे शहर के अंदर यातायात का दबाव कम होगा और मुख्य मार्गों पर आवागमन अधिक सुगम एवं व्यवस्थित होगा। साथ ही पुराने बस स्टैंड परिसर में श्रमिकों के लिए निर्धारित स्थान उपलब्ध होने से उन्हें रोजगार की तलाश में सड़क या चौराहों पर खड़े होने की आवश्यकता नहीं होगी।

श्रमिकों को मिला अपना निर्धारित स्थान

नई व्यवस्था के तहत पुराने बस स्टैंड परिसर को अस्थायी लेबर चौक के रूप में विकसित किया गया है। अब रोजगार की तलाश में शहर आने वाले श्रमिक लालता चौक अथवा मुख्य सड़क पर एकत्र नहीं होंगे। श्रमिकों को काम पर ले जाने वाले नियोजक भी सीधे पुराने बस स्टैंड पहुंचकर श्रमिकों से संपर्क कर सकेंगे।

इस व्यवस्था से श्रमिकों को एक निश्चित और व्यवस्थित स्थान मिलेगा, वहीं मुख्य सड़क और चौराहे पर भीड़ तथा आवागमन में होने वाली बाधा को कम करने में मदद मिलेगी।

लेबर चौक पर पहले दिन स्वास्थ्य शिविर

प्रशासन ने पुराने बस स्टैंड को केवल श्रमिकों के एकत्र होने के स्थान के रूप में निर्धारित करने के साथ उनकी सुविधाओं का भी ध्यान रखा। पहले दिन ही परिसर में स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अशोक खरे सहित अन्य चिकित्सक एवं स्वास्थ्यकर्मी शिविर में उपस्थित रहे और श्रमिकों का स्वास्थ्य परीक्षण किया।

सहायक श्रम पदाधिकारी आकांक्षा पाठक ने श्रमिकों से संवाद कर उन्हें शासन द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी। श्रमिकों को योजनाओं के लाभ, पात्रता एवं उपलब्ध सुविधाओं के संबंध में जानकारी प्रदान की गई।

इस प्रकार नई व्यवस्था के पहले दिन ही प्रशासन ने श्रमिकों के रोजगार के साथ-साथ उनके स्वास्थ्य और कल्याण से जुड़े पहलुओं को भी प्राथमिकता दी।

बुजुर्ग यात्रियों की परेशानी बनी प्रशासन की संवेदनशीलता की मिसाल

नई व्यवस्था के पहले दिन कुछ बुजुर्ग यात्री बस की तलाश में पुराने बस स्टैंड पहुंच गए। बसों का संचालन नए बस स्टैंड से होने की जानकारी मिलने पर उन्हें असुविधा की स्थिति का सामना करना पड़ा। उनकी परेशानी को देखते हुए परिवहन विभाग के कर्मचारियों ने तत्काल सहायता उपलब्ध कराई और उन्हें नए बस स्टैंड तक पहुंचाने की व्यवस्था की।

नई व्यवस्था के संक्रमण काल में यात्रियों की परेशानी को समझते हुए तत्काल सहायता उपलब्ध कराने की यह पहल प्रशासन की संवेदनशील कार्यप्रणाली का उदाहरण बनी।

नए बस स्टैंड पर यात्रियों की सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता

कलेक्टर विकास मिश्रा ने परिवहन विभाग को निर्देश दिए हैं कि नए बस स्टैंड पर यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। इसके लिए ऑटो एवं ई-रिक्शा के सुचारू संचालन की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है, ताकि बस से उतरने वाले यात्री आसानी से अपने गंतव्य तक पहुंच सकें।

इसके साथ ही नए बस स्टैंड पर साफ-सफाई, पेयजल और अन्य आवश्यक यात्री सुविधाओं को व्यवस्थित एवं सुचारू बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। नई व्यवस्था के शुरुआती दिनों में यात्रियों को आवश्यक मार्गदर्शन और सहयोग उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है।

यातायात व्यवस्था के साथ श्रमिकों की सुविधा का भी ध्यान

बस संचालन को नए बस स्टैंड पर स्थानांतरित करने और पुराने बस स्टैंड को अस्थायी लेबर चौक के रूप में निर्धारित करने से शहर में यातायात प्रबंधन के साथ श्रमिकों के लिए रोजगार का एक निश्चित स्थान उपलब्ध हुआ है।

प्रशासन की यह नई व्यवस्था शहर की यातायात जरूरतों और श्रमिकों की रोजमर्रा की जरूरतों के बीच संतुलन बनाने का प्रयास है—जहां एक ओर शहर को सुगम यातायात व्यवस्था मिलेगी, वहीं दूसरी ओर श्रमिकों को रोजगार की तलाश के लिए व्यवस्थित स्थान और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी।