सहायक संचालक उद्यान जी आर बघेल ने जिले में सब्जी एवं मसाला फसलों की खेती कर रहे किसानों को फसलों में कीट, व्याधियों एवं रोगों की रोकथाम के लिए आवश्यक सावधानियां बरतने की सलाह दी है। उन्होंने बताया कि वर्तमान मौसम में हवा में नमी के कारण फसलों में रस चूसक कीट एवं फफूंदजनित रोगों का प्रकोप बढ़ सकता है। ऐसे में किसान समय रहते फसलों का निरीक्षण कर उचित प्रबंधन करें।
उन्होंने बताया कि सब्जियों एवं बगीचों में जलभराव की स्थिति होने पर तत्काल जल निकासी की व्यवस्था करें। पौधों की जड़ों एवं तनों के चारों ओर मिट्टी चढ़ाएं, ताकि पानी पौधों के पास जमा न हो। खेत से खरपतवार निकालकर नियमित रूप से निंदाई-गुड़ाई का कार्य भी करें, जिससे फसल का उचित विकास हो सके।
बेल वाली सब्जियों जैसे लौकी, करैला, गिलकी, तरोई एवं खीरा आदि की फसलों को लकड़ी का सहारा देकर तार अथवा खूंटे की सहायता से जाली तैयार कर ऊपर चढ़ाने की सलाह दी गई है। इससे पौधों में हवा का संचार बेहतर रहेगा और फसल को जमीन के संपर्क में आने से होने वाले रोगों से बचाने में मदद मिलेगी।
उद्यानिकी विभाग ने किसानों को फसलों में फफूंदजनित रोग एवं कीटों की रोकथाम के लिए ट्राइकोडर्मा विरिडी जैसे जैविक फफूंदनाशी तथा नीम तेल का अनुशंसित मात्रा में प्रयोग करने की सलाह दी है। आवश्यकता के अनुसार फसल एवं रोग-कीट की स्थिति के आधार पर विभाग द्वारा अनुशंसित फफूंदनाशी अथवा कीटनाशी का उपयोग किया जा सकता है।
उन्होंने किसानों से संक्रमित पत्तियों एवं फलों को पौधों से अलग कर नष्ट करने की अपील की है, क्योंकि संक्रमित हिस्से आगे रोग एवं कीटों के प्रसार का स्रोत बन सकते हैं। साथ ही अधिक वर्षा अथवा जलभराव के कारण मिट्टी से पोषक तत्वों के बह जाने की स्थिति में जल निकासी के बाद मिट्टी एवं फसल की स्थिति का आकलन कर संतुलित पोषण प्रबंधन करने की सलाह दी गई है। विभाग ने किसानों से फसलों की नियमित निगरानी करने और समस्या दिखाई देने पर निकटस्थ उद्यानिकी कार्यालय से तकनीकी मार्गदर्शन लेने की अपील की है।

