उमरिया 13 सितंबर - गणेश चतुर्थी पर्व को पर्यावरण अनुकूल बनाने एवं नदी-तालाब सहित जल स्त्रोतों को प्रदूषण से बचाने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद उमरिया विकासखंड करकेली के तत्वावधान में ‘माटी गणेश-सिद्ध गणेश’ अभियान के अंतर्गत एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम जिला समन्वयक रविन्द्र शुक्ला की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ।

प्रशिक्षण मिट्टी गणेश सिद्ध गणेश अभियान अन्तर्गत सामाजिक कार्यकर्ताओं को मिट्टी से गणेश प्रतिमा बनाने की विधि की व्यावहारिक जानकारी दी। उन्होंने स्वयं प्रतिमा बनाकर निर्माण के विभिन्न चरण समझाए तथा प्रतिभागियों से भी प्रतिमा निर्माण का अभ्यास कराया। इस अवसर पर परामर्शदाता संतोष त्रिपाठी राघवेंद्र द्विवेदी, जय भारती साहू सुनीता सिंह युवराज सिंह संजय साहू एवं सीएमसीएलडीपी छात्र छात्राएं उपस्थित रहे।

खास बातें

  • प्रशिक्षण का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण एवं जल स्त्रोतों की स्वच्छता के प्रति जनजागरूकता बढ़ाना रहा।
  • वक्ताओं ने बताया कि प्लास्टर ऑफ पेरिस एवं रासायनिक रंगों से बनी प्रतिमाओं का जल स्त्रोतों में विसर्जन जल प्रदूषण का कारण बनता है।
  • इसलिए लोगों से मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमा स्थापित करने और घर पर ही गमले, टब या बड़े बर्तन में विसर्जन करने की अपील की गई।

प्रशिक्षण का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण एवं जल स्त्रोतों की स्वच्छता के प्रति जनजागरूकता बढ़ाना रहा। वक्ताओं ने बताया कि प्लास्टर ऑफ पेरिस एवं रासायनिक रंगों से बनी प्रतिमाओं का जल स्त्रोतों में विसर्जन जल प्रदूषण का कारण बनता है। इसलिए लोगों से मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमा स्थापित करने और घर पर ही गमले, टब या बड़े बर्तन में विसर्जन करने की अपील की गई।

विसर्जन के बाद बची मिट्टी का उपयोग पौधों एवं गमलों में किया जा सकता है। इससे धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी मजबूत होगा। सामाजिक कार्यकर्ताओं से आह्वान किया गया कि वे माटी गणेश बनाने की कला को अपने-अपने गाँवों एवं क्षेत्रों तक पहुंचाएं और लोगों को पर्यावरण अनुकूल गणेश उत्सव मनाने के लिए प्रेरित करें।

अभियान का उद्देश्य आस्था, परंपरा और पर्यावरण संरक्षण के समन्वय के साथ गणेश उत्सव मनाने के लिए समाज को जागरूक करना है।