सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत विकासखंड जबलपुर के ग्राम समनापुर में आत्मा परियोजना द्वारा प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने एवं इसके प्रति किसानों को जागरूक करने के उद्देश्य से कृषक संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित कृषकों के साथ प्राकृतिक खेती की विभिन्न तकनीकों, इसके लाभ, कम लागत में उत्पादन तथा रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने के विषय पर चर्चा की गई। कृषकों को प्राकृतिक खेती में जीवामृत, बीजामृत एवं अन्य प्राकृतिक कृषि आदानों के उपयोग की जानकारी प्रदान की गई।
संवाद के दौरान कृषक श्रीमती बूँदा सैयाम ने प्राकृतिक खेती को लेकर अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि वे अपनी मक्का की फसल में 2-3 बार जीवामृत का छिड़काव कर चुकी है जिससे उनकी फसल में भुट्टे का आकार पहले की तुलना में बढ़ गया है। कृषक दीपा ने बताया कि उनकी अरहर की फसल में वृद्धि नहीं हो रही थी।
खास बातें
- संवाद के दौरान कृषक श्रीमती बूँदा सैयाम ने प्राकृतिक खेती को लेकर अपने अनुभव साझा किए।
- संवाद के इस कार्यक्रम में किसानों के साथ खेती में आने वाली समस्याओं एवं उनके समाधान पर चर्चा की।
- कार्यक्रम के पश्चात समनापुर में निर्मित बीआरसी यूनिट का अवलोकन भी सभी किसानो को करवाया गया।
वो इस फसल की जोत कर कुछ और फसल लगाने का सोच रही थी। लेकिन जैसे ही उन्हें जीवामृत के बारे में जानकारी मिली उन्होंने उसका उपयोग अपनी फसल में किया। आज उनकी अरहर की स्थिति बहुत अच्छी हो गई है। श्री पूरण लाल ने बताया कि उनकी अरहर की फसल में पहले भुनगी की समस्या थी। जैसे ही जीवामृत का छिड़काव किया खेत से भुनगी गायब हो गई।
संवाद के इस कार्यक्रम में किसानों के साथ खेती में आने वाली समस्याओं एवं उनके समाधान पर चर्चा की। साथ ही स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करते हुए प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने एवं अधिक से अधिक कृषकों को इससे जोड़ने पर जोर दिया गया। कार्यक्रम के पश्चात समनापुर में निर्मित बीआरसी यूनिट का अवलोकन भी सभी किसानो को करवाया गया। वहां से जीवामृत बीजामृत घनजीवमृत निर्मास्त्र लेने के लिए प्रेरित किया गया तथा इनकी निर्माण विधि के बारे में भी जानकारी दी गई।
संवाद के कार्यक्रम में परियोजना संचालक आत्मा डॉ इंदिरा त्रिपाठी, बीटीएम रीता पांडे एवं एटीएम नेहा शर्मा सहित ग्राम के कृषक उपस्थित रहे। कृषक संवाद के माध्यम से किसानों को प्राकृतिक एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया तथा कृषि में नवाचार और पारंपरिक ज्ञान के समन्वय से उत्पादन को बढ़ावा देने पर चर्चा की गई।





